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Thursday, September 30, 2010

The Real Title Suit!

The only Real Title Suit that is worth getting resolved is for the Title
“me”.
All the rest of the title suits resolved or unresolved…hardly matters!

All the rest of the title suits will enmesh and strengthen the Title ‘me’.
Whereas this Real Title Suit will surely unveil the Title ‘me’!

Best wishes :-)

-Nitin Ram
30 September 2010
http://www.abideinself.blogspot.com/

राम राम राम अवघेचि म्हणती कोणी न जाणती आत्माराम!

राम राम राम अवघेचि म्हणती कोणी न जाणती आत्माराम!
राम राम राम अवघेचि म्हणती कोणी न जाणती आत्माराम!



                                    राम हा कालचा सूत दशरथाचा, अनंत युगांचा आत्माराम!
                                 राम राम राम अवघेचि म्हणती कोणी न जाणती आत्माराम!

                            त्या रामासी हा राम ठावे जरी असता, शरण का जाता वसिष्ठासी!
                               राम राम राम अवघेचि म्हणती कोणी न जाणती आत्माराम!

                                      तुका म्हणे राम तुझा तुजपाशी, पुसुनी घेशी गुरुमुखे!
                               राम राम राम अवघेचि म्हणती कोणी न जाणती आत्माराम!

                                                                     -नितीन राम
                                                                  ३० सप्टेंबर २०१०



Sunday, September 05, 2010

बंधू...तुला रे कसला मृत्यू! :-)

बीजातून आले फुल, फुलातून आला सुगंध;
फुल गेले कोमेजून, हा काय सुगंधाचा मृत्यू...!!
बंधू...तुला रे कसला मृत्यू...!!

वेळूतून झाली बासरी, बासरीतून उठला नाद;
बासरी गेली तुटून, हा काय नादाचा मृत्यू....!!!
बंधू...तुला रे कसला मृत्यू...!!

आकाशात जमला ढग, ढगातून आला पाऊस;
ढग गेला बरसून, हा काय पाण्याचा मृत्यू...!!!
बंधू...तुला रे कसला मृत्यू...!!

मातीतून आली उदबत्ती, त्यातून पेटला अग्नि;
उदबत्ती गेली विझून, हा काय अग्निचा मृत्यू...!!!
बंधू...तुला रे कसला मृत्यू...!!

ऊसातून आली साखर, साखरेत आली गोडी;
साखर गेली संपून, हा काय गोडीचा मृत्यू.....!!!
बंधू...तुला रे कसला मृत्यू....!!

अन्नातून आला अन्नाचा देह,
अन्नरसाच्या गुणातून प्रकटले सत्व; 
सत्व नव्हे रे हे तर 'स्वत्व'... स्व्-तत्व!
देह-अन्न जाणारच ना रे सुकून,
पण हा काय स्वत्वाचा मृत्यू....!!! 
बंधू...तुला रे कसला मृत्यू....!!!!

जे नाहि त्याचाच रे मृत्यू,
जो आहेच त्याला कसला मृत्यू..!
जन्म-मृत्यूला जाता येता पहाणारा रे तू, 
बंधू...अरे, तुला रे कसला मृत्यू...!!
बंधू...तुला रे कसला मृत्यू...!! :-)

सप्रेम
-नितीन राम
०५ सप्टेंबर २०१०
http://www.abideinself.blogspot.com/

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Saturday, September 04, 2010

नाद

नाद* नाहि करायचा, नाद**...फक्त ऐकायचा! :-)

जो सकारण येणार, तो कधीतरी जाणारच ना! जो अकारण आहेच, तो कोठे जाणार!

(*नादः जो विविध प्रक्रियांमुळे, सकारण उठतो तो आहत नाद, 
**नादः जो कायम, अकारण असतोच तो अनाहत नाद)

सप्रेम शुभेच्छा

-नितीन राम

०४ सप्टेंबर २०१०